महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्दांजलि

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महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्दांजलि

06 दिसम्बर 1956 अंबेडकर साहब थे तो आज हम हैं
वो एक समय रूखी सूखी रोटी खाकर हमारे लिए अधिकारों की लड़ाई लड़ते थे इसीलिए अधिकार पाकर हम तीन समय खाना खा रहे हैं उन्होंने हमारे बच्चों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपने चार बच्चों की मौत तक की परवाह नहीं की थी इसीलिए आज हम हमारे बच्चों को अच्छी तरह से पाल रहे हैं उन्होंने अपने घर-परिवार की सुख सुविधाओं को त्यागकर* हमारे घर-परिवारों के लिए लड़ाई लड़ी थी और इसी संघर्षशील लड़ाई में उनकी पत्नी माता रमाबाई अंबेडकर का मात्र 35 साल की उम्र में निधन हो गया था इसीलिए आज हम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ परिवार में रह रहे हैं उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर हमें प्रतिनिधित्व करने का अधिकार और मत देने का अधिकार दिलवाया था ताकि हम अपना प्रतिनिधि अपनी मर्जी से अपने मताधिकार का प्रयोग करके चुन सकें और नौकरियाँ पाकर बहुजन समाज का सरकारी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व कर सकें उन्होंने हमें स्वच्छ पानी पिलाने के लिए ब्राह्मणवादियों से लाठियां खाई थी ताकि हम साफ फिल्टर पानी पी सकें उन्होंने हमें आजाद भारत में आजाद रखने के लिए 24-24 घंटे जागकर और भूखे-प्यासे रहकर संविधान लिखा था ताकि हम आजाद भारत में अधिकार सम्पन्न होकर स्वछंद वातावरण में जी सकें
उनके अतुलनीय अकल्पनीय अनुकरणीय अद्भुत महान बलिदान को याद करके आँखों में से खून के आंसू निकल आते हैं कि उन्होंने 6743 पिछड़ी जातियों सहित सिक्ख सिंधी ईसाई मुसलमानों और सभी जाति धर्मों की महिलाओं को आजाद भारत में संविधानसंवत् आजाद रखने के लिए कट्टरपंथियों से कितना संघर्ष किया था आज हम उनके महान कार्यों के हृदय से ऋणी हैं और रहेंगे हम उनका यह ऋण जीवनपर्यंत नहीं उतार सकते हैं हम केवल मात्र उन्हें सम्मान से स्मरण कर सकते हैं कि बाबा साहब आपने हमारे लिए जो कुछ भी किया है उसके लिए हम और हमारी पीढ़ियां सदैव आपकी ऋणी रहेंगी बाबा साहब हम आपको इस महापरिनिर्वाण दिवस पर सम्मानपूर्वक स्मरण करते हैं और आपके संघर्ष को अंतिम चरण तक ले जाने का प्रण करते हैं बाबा साहब हम यह भी प्रण करते हैं कि जिन दुश्मनों से आपने लोहा लेकर हमें संवैधानिक आजादी दिलवाई है हम उस आजादी का पूरा पूरा ख्याल रखेंगे बाबा साहब हम यह भी प्रण करते हैं कि जिन दुश्मनों से आपने लोहा लेकर हमें संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की है हम उन दुश्मनों का साथ देकर या उनका अनुसरण करके हम कभी आपकी पीठ पर कभी छूरी नहीं घोंपेंगे
महामानव को कोटि-कोटि हार्दिक श्रद्धांजलि

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