विद्यार्थी प्रमाणिकता के साथ आगे बढ़े – राम नाईक पूर्वांचल विश्वविद्यालय का मनाया गया 22 वां दीक्षांत समारोह

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विद्यार्थी प्रमाणिकता के साथ आगे बढ़े – राम नाईक
पूर्वांचल विश्वविद्यालय का मनाया गया 22 वां दीक्षांत समारोह जौनपुर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 22 वें दीक्षांत समारोह में प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री राम नाईक जी ने प्रथम प्रयास में स्नातक एवं स्नातकोत्तर में सर्वोच्च अंक पाने पर 58 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा 115 पी-एच.डी. धारकों को उपाधि एवं गणित में डॉ सत्य प्रकाश सिंह को डी.एस-सी की उपाधि दी गई। माइकोलॉजी एवं पौध रोग विज्ञान विभाग कृषि विज्ञान संस्थान बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी में रहे प्रो0 उदय प्रताप सिंह को मानद उपाधि डाक्टर आफ साइंस से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बतौर अध्यक्षीय संबोधन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री राम नाईक जी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों का पहला पड़ाव है यहा से उनकी दूसरी यात्रा का प्रारम्भ होता है। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल और उपाधि पाने वाले विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में जागरूक रहने की जरूरत है क्योंकि अब आप के पँखों में ताकत आ गई है और आकाश में उड़ान के दौरान काफी प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा के दीक्षांत में शपथ लेना सरल है लेकिन उसे निभाना कठिन है। इसे निभाने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना बहुत जरूरी है । उन्होंने सलाह दी कि आप प्रमाणिकता एवं पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ो असफलता के बारे में आत्मनिरीक्षण करो अपने को अपडेट रखो तो उपलब्धियां आपके चरण चूमेगी। उन्होंने पूरे प्रदेश में उच्च शिक्षा का विश्लेषण करते हुए कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल और उपाधि पाने वालों में 51 फीसदी छात्राएं हैं जोकि महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि सन 2000 में सर्व शिक्षा अभियान की बुनियाद अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने रखी थी और वर्तमान की मोदी सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा दिया जिसका असर अब देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से हटकर दो बातें वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में देखने को मिलती है पहला खेल के क्षेत्र में और दूसरा केंपस प्लेसमेंट के क्षेत्र में आगे है जो कि सराहनीय कार्य है इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शान्ति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से विभूषित राष्ट्रीय भौतिकीय प्रयोगशाला के पूर्व निदेशक एवं वर्तमान में रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन भारत सरकार के डॉ0 राजा रमन्ना विशिष्ट फेलो प्रो0 विक्रम कुमार ने कहा कि दीक्षांत समारोह में आज का दिन विद्यार्थियों का दिन है उनके कठिन परिश्रम और परिणाम का दिन है। मुझे ऐसे ही युवाओं से मिलने और संवाद करने में खुशी का एहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिवर्तन ने समाज में एक बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन किया है जिससे लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है। कहा कि हमें और भी वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है क्योंकि हमें वैश्विक स्तर पर कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है जो कि मौलिक रूप से वैज्ञानिक है वह चाहे जलवायु परिवर्तन ऊर्जा संशोधन खाद उत्पादन आतंकवाद से लेकर स्वास्थ्य गरीबी भूख जैसी पारंपरिक समस्या क्यों ना हो हर जगह विज्ञान की भूमिका है। आज के समय में आपके पास बहुत सारे मौके और करियर है। निजी क्षेत्र ने व्यापक संभावनाओं के साथ अपने आप को एक महान नियोक्ता के रूप में विकसित किया है। देश में स्वरोजगार उद्यमिता एवं स्टार्टअप की असीम संभावना है। हमारे स्नातकों की पूरी दुनिया में मांग है हमने अपने ज्ञान और कौशल के साथ दुनिया की मदद करके एक बड़ा व्यवसाय किया है। उन्होंने उपाधि धारको को ईमानदारी के साथ कड़ी मेहनत करने की सलाह दी उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में हमारे देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। इसके बावजूद हमें सफाई और भ्रष्टाचार जैसे समस्याओं से निपटने के लिए एक नए दृष्टिकोण की जरूरत है। डीएससी की मानद उपाधि से सम्मानित होने वाले बीएचयू के प्रोफेसर उदय प्रताप सिंह ने कहा की अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फोरम में अमेरिका के खिलाफ लड़ाई लड़कर हमने नीम का पेटेंट वापस कराया इस पर मेरा 4 रिसर्च पेपर प्रकाशित था जिस कारण यह वापस हुआ हालांकि इस काम में महत्वपूर्ण भूमिका दिल्ली की स्वयँसेवी संस्था वंदना शिवा ने निभाई। कुलपति प्रो. डॉ. राजाराम यादव ने अपने सम्बोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं देश के समस्त विश्वविद्यालयों की पंक्ति में सच्चे अर्थों में प्रमुख स्थान प्राप्त करे। न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं ना पुनर्भवम्, कामये दुःख तत्वानां प्रणिना

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