सम्पादकीयता वही जो दिल को छू जाए / शमशी अजीज

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शमशी अज़ीज़ सम्पादकीयता वही जो दिल को छू जाए।
जौनपुर । उत्तर प्रदेश आज सम्पादको का स्थान धनपूँजी राजनेता व उधोगपति लेते जा रहे है जिससे सम्पादकों व पत्रकारों की गरिमा का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता ही जा रहा है आज समाचार पत्रों में भी वही समाचार होते है जिससे स्वयं का लाभ हो न कि वो समाचार जो वास्तविकता के धरातल पर सत्य हो यदि कोई पत्रकार व कलमकार अपनी लेखनी की शक्ति का प्रदर्शन करना भी चाहता है तो सम्पादक महोदय जी उस शक्ति को ध्वस्त करने का भरपूर प्रयास करते रहते है जिससे पत्रकारिता की स्थिति यथास्थिति बनी रहती है पूर्व काल मे जिस प्रकार सम्पादक पत्रकारों की विचार धाराओ से सहमत रहते थे परंतु आज सम्पादक व पत्रकारों की विचार धारा के मध्य विज्ञापन रूपी व्यापार का चलन चरम पर है जिससे आज सम्पादकों में न तो समाज सेवा भाव है और न ही एकजुटता का कोई मंच दिखता है अभी कुछ दिन पूर्व ही सम्पादक मंडल के पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह में आये राज्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी जी ने पत्रकारों को सम्भोधित करते हुए जिस प्रकार सम्पादकों के कार्य पर प्रश्नवाचक शब्दो का प्रयोग करते हुए कहा कि आज समाचार पत्रों में बलात्कार जैसे शब्दो का प्रयोग हो रहा है जिसका उपयोग पहले समाचार पत्रों में नही होता था उनके ये शब्द अत्यंत शोचनीय है जिस पर सभी सम्पादकों को मंथन करने की आवश्यकता है सम्पादकों को निस्वार्थ भाव से समाज सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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