हक़ के साथ रहना मुश्किल हो सकता है ना मुम्किन नहीं : शाह आलम अंसारी

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हक़ के साथ रहना मुश्किल हो सकता है ना मुम्किन नहीं जितना नुकसान आस्तीन के सांपो से होता है खुले दुश्मनों से नहीं होता अपना मुस्तक़बिल और अपनी तारीख़ बगैर तासुब के देखा जायेगा तब आँख खुलेगी वर्ना झंडा डंडा ढोना ही नसीब हो जायेगा अखिलेश ज़िंदाबाद मायावती ज़िंदाबाद मोदी ज़िंदाबाद और सोनिया ज़िंदाबाद करने से कुछ नहीं होगा जब तक अपने ज़िन्दा होने का एहसास ना हो यही लोग हमारे औए आप के दिलों में खौफ दिखाते है और वोट लेकर ज़लील करते है कोई मूर्ति दे देता है कोई लैपटॉप कोई ई रिक्शा और ये बायलर मुर्गियों की तरह चु चु करके उनसे लिपट जाते है क्या हालात झंडा उठाने से बदलते है
कब अक़ल आएगी आस्तीन के सांप को कब पहचानो गे ऐ बेहतरीन उम्मत के लक़ब वालों पीस पार्टी जौनपुर शाह आलम अंसारी

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