99 हिन्दू नही जानते शिवलिंग का वास्तविक अर्थ, शिव भक्त जरुर पढ़े..

महादेवो के देव महादेव, भगवान् शिव ही सत्य है, शिव ही आदि और अनंत के देवता है शिव का ना तो कोई स्वरूप है न कोई आकार, अर्थात शिव निराकार है और इस ब्रमांड के कण कण में शिव का वास होता है ! इसीलिए भगवान् शिव के निराकार रूप को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है.

लेकिन बहुत से लोगो को शिवलिंग का वास्तविक अर्थ ही नहीं पता और ऐसे लोग अन्य लोगो को शिवलिंग का गलत अर्थ बता कर उन्हें भी भर्मित करते रहते है और शिवलिंग की पूजा की आलोचना करते रहते है ! इसलिए आज हम आपको शिवलिंग का सही अर्थ बताने जा रहे है ताकि आप भी ये जान सके कि वास्तव में शिवलिंग है क्या, किस चीज़ को दर्शाता है शिवलिंग और शिवलिंग की पूजा क्यों जाती है !

वास्तव में शिवलिंग संस्कृत भाषा से लिया गया है और संस्कृत भाषा का सही ज्ञान न होने के कारण कुछ अज्ञानी लोगो ने शिवलिंग का गलत मतलव निकाल कर, शिवलिंग का मजाक उडाना शुरू कर दिया ! उन्होंने परम पवित्र शिवलिंग को गुप्तांग बता कर न जाने कितनी काल्पनिक धारणाये बना ली और शिवलिंग पूजा की आलोचना करनी शुरू कर दी ! लेकिन ऐसे अज्ञानी लोग क्या जाने की वास्तव में इसके पीछे सच्चाई है क्या ! जिस तरह हर एक शव्द के अनेक अर्थ निकलते है उसी प्रकार शिवलिंग के बारे में भी लोगो की अपनी- अपनी धारणाये है !

दोस्तों संस्कृत भाषा से लिए गए शब्द शिवलिंग में लिंग का वास्तविक अर्थ है प्रतीक है, यानी शिवलिंग, शिव का प्रतीक है और शिव के इस प्रतीक की हम पूजा करते है ! जैसा की हमने पहले बताया की भगवान शिव इस पुरे ब्रह्माण्ड में समाये है इसलिए शिवलिंग की पूजा करना यानि इस पुरे ब्रह्माण्ड की पूजा करना होता है ! आपने अपने जीवन में तरह तरह के शिवलिंग को देखा होगा, कुछ शिवलिंग प्रक्रितक रूप से प्रकट हुए है तो कुछ को मानव ने निर्मित किया है !

लेकिन यदि हम बात करे 12 ज्योतिर्लिंगों की तो इनका आकार सभी शिवलिंगों के अलग है ! ऐसा इसलिए है क्यूंकि हर शिवलिंग को एक अलग मकसद के लिए बनाया गया है ! जिनमे से कुछ शिवलिंग ध्यान साधना के लिए बनाये गए है, तो कुछ सेहत और खुशहाली के लिए बनाए गए है ! लेकिन इन सब शिवलिंगों में एक बात तो बिलकुल समान है कि ये शिवलिंग किसी पुरुष या किसी स्त्री का प्रतीक न होकर इस पुरे ब्रह्माण्ड का प्रतीक है ! यानी ये आकाश , शुन्य , और निराकार का प्रतीक है !

वैज्ञानिकों के दवार ली गयी कुछ तस्वीरो में भी स्पष्ट है की हमारा ब्रहामंड बिलकुल शिवलिंग के जैस ही है ! सकंद पुराण में भी यही बताया गया है कि आकाश स्वयं एक लिंग है और शिवलिंग समस्त ब्रह्माण्ड की धुरी है ! तो मतलब साफ़ है कि शिवलिंग अनन्त है.

शिवलिंग की न तो कोई शुरुआत है और न ही कोई अंत ! इसी  कारण शिवलिंग का एक अर्थ अनंत भी होता है ! इसलिए अब यदि कोई भी आपसे शिवलिंग के बारे में गलत अर्थ निकालते हुए बात करे तो आप उसे ये वीडियो जरुर दिखा देना ताकि शिवलिंग के बारे में उसका ये भ्रम दूर हो जाए और वी भी जान जाए की वास्तव में शिवलिंग का अर्थ होता है शिव का प्रतीक यानिकी इस समस्त ब्रह्माण्ड का प्रतीक !

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