एक ऐसा मंदिर जिसके तालाब में वास करते है भगवान विष्णु, लेकिन दिखाई देते है भगवान शिव..

आपने कई ऐसे मंदिरों के बारे में सुना होगा जो अपने कई रहस्यों के कारण  हमें अपनी ओर आकर्षित करते रहते है और ये रहस्य ऐसे है जिन्हें आज तक विज्ञानं भी नहीं समझ पाया ! मंदिरों के ये रहस्य आज भी सबके लिए एक पहेली बने हुए है ! आज हम आपको ऐसे ही एक अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जिसका रहस्य जान कर आप हैरान रह जायेंगे ! तो चलिए जानते है इस विशेष मंदिर के वारे में …

वैसे ये तो आप जानते ही होंगे कि भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी के साथ शेष नाग पर विराजमान होकर शीर सागर में रहते है ! लेकिन क्या आपको पता है कि इस धरती पर भी भगवान विष्णु एक विशाल तलाव में वास करते है ! जी हाँ दोस्तों काठमांडू के मध्य से करीब 10 किलो मीटर की दुरी पर शिवपुरी हिल के पास एक मंदिर है जिसका नाम है बुढा नीलकंठ मंदीर और यही वो मंदिर है जिसके तालाब में भगवान् विष्णु की चतुर्भुजी प्रतिमा शेष नाग पर शयन अवस्था में विराजमान है !लेकिन इस मंदिर के बारे में हैरान कर देने वाली बात ये है कि इस मंदिर के तालाब में प्रतिमा है भगवान विष्णु की लेकिन पानी में नज़र आते है भगवान शिव !

कहा जाता है कि ये काठमांडू का सबसे बढ़ा और माना हुआ मंदिर है इस मंदिर में मांगी गयी मुराद कभी खाली नहीं जाती ! ये मंदिर इतना खुबसूरत है यहाँ दूर दूर से आने वाले शर्धलुयो की भीड़ उमड़ी रहती है ! इस मंदिर में एक विशाल तालाब है जिसकी लम्बाई 13 मीटर है जिसमें भगवन विष्णु जी की मूर्ति सोयी हुयी अवस्था में है और इस मूर्ति की लम्बाई पांच मीटर की है ! इस मूर्ति को देख कर ही इसकी भव्यता का अंदाज़ा लग जाता है.

भगवान् विष्णु शेषनाग की कुंडली पर विराजमान है, इस मूर्ति में विष्णु जी के चार हाथ उनके चार दिव्य गुणों को दर्शाते है जो कि इस प्रकार है उनके एक हाथ में चक्र मन का प्रतिनिधित्व करते है दूसरा शंक चार तत्वों को,  तीसरा कमल का फुल चलते हुए ब्रह्माण्ड को दर्शाता है और चोथा गदा, प्रधान ज्ञान को दर्शाता है ! लेकिन इस मंदिर में सबसे ख़ास बात ये है कि यहाँ प्रतिमा है भगवान विष्णु की लेकिन दिखाई देते है  भगवान् शिव !

कहा जाता है कि इस मंदिर के तालाब का पानी गोसाई कुंड में उत्पन्न हुआ था यहाँ पर हर साल अगस्त के महीने में एक विशाल उत्सव होता है और उस दौरान इस तालाव के पानी में भगवान् शिव की झलक देखने को मिलती हैं !जी हां दोस्तों अगर कभी अगस्त के महीने में आप भी इस मंदिर में  जाते है.

तो आपको भी इस तलब के पानी में शिव की झलक देखने को मिलेगी ! वहां के लोगो की मान्यता है कि ऐसा इसलिए होता है क्युकी जब समुन्द्र मंथन हुआ था उस दौरान भगवान शिव के दवारा विष पि लेने के कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और विष के कारण जलने लगा ! तव भगवान् शिव ने इस स्थान पर आकर अपने त्रिशूल से एक पहाड़ पर प्रहार करके झील का निर्माण किया और इस झील का पानी पिया था ! यही कारण है कि इस मंदिर का नाम नील कंठ है और इसी कारण यहाँ भगवान शिव् भी अप्रतक्ष रूप में विद्यमान है !

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