एक से अधिक व्यक्ति से संभोग करने वालों को खतरा ज्यादा ,कॉ,न्डोमले.स से-क्स के क्या होते हैं रिस्क..

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स – जिस प्रकार जीवन में व्यक्ति के लिए खाना, पीना, सोना, काम करना आदि अहम है ठीक उसी प्रकार से.,क्स भी दिनचर्या का हिस्सा है। इसलिए जब बात से.,क्स की आती है तो जरूरी है कि सुरक्षित से.,क्स कर बीमारियों से बचाव किया जाय। लाइफ में से.,क्स के जहां कई फायदें हैं, जैसे यह शारिरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ्य रखने में मदद करता है ठीक उसी प्रकार सुरक्षित से.,क्स बेहद जरूरी है। यदि कोई कॉ,न्डो-मलेस से-क्स की ओर रूख करता है तो उसके कई घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।

कॉन्डोम और डेंटल डैम का इस्तेमाल सामान्य तौर पर एचआईवी के साथ सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन को रोकने के लिए किया जाता है। यह बीमारी से,क्शु.अल पार्टनर से एक दूसरे में फैलती है। एसटीआई कंडोमलेस से.,क्स के साथ कई अलग अलग तरीकों से संभोग करने के कारण होती है, जिसमें एनल से.,क्स, वजाइनल से.,क्स और ओरल से.,क्स शामिल है। कॉ,न्डो-मलेस से-क्स के कारण संभावना रहती है कि आप या आपके पार्टनर यदि किसी दूसरे के साथ भी शारिरिक संबंध कायम कर चुके हैं तो उसके कारण बीमारी हो सकती है। तो आइए इस आर्टिकल में कॉ,न्डो-मलेस से-क्स करने से क्या नुकसान होता है उसके बारे में जानते हैं, ताकि सुरक्षा पहलुओं को जानकर बीमारियों से बचाव किया जा सके।

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स में एसटीआई की रहती है ज्यादा संभावना – द फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की रिपोर्ट के अनुसार रोजाना कई लोग एसटीआई। से.,क्स के दौरान कॉन्डोम का इस्तेमाल कर एसटीआई, एचआईवी, गोनोरिया, क्लाइमीडिया, सिफलिस और कुछ प्रकार के हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के होने के संभावनाओं को कम किया जा सकता है।

देखा गया है कि संभोग के कुछ दिनों, महीनों व साल के बाद इंफेक्शन के बावजूद लक्षण नहीं दिखाई देता है। वहीं यदि इसका इलाज नहीं कराया गया और इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया तो उसके कारण कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। संभव है कि कई ऑर्गन डैमेज होने के साथ इनफर्टिलिटी इशू के साथ प्रेग्नेंसी में शिकायत और कुछ मामलों में मरीज की मौत तक हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि बीमारी से जितना संभव हो सके बचाव किया जाए। इसके लिए आप चाहें तो एक्सपर्ट या डॉक्टर की मदद से सकते हैं। यदि सलाह न ली जाए तो लोगों को सिफलिस, हर्पिस और गोनोरिया, प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन हो सकता है।

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एक से अधिक व्यक्ति से संभोग करने वालों को खतरा ज्यादा – वैसे व्यक्ति जो एक से अधिक व्यक्ति के साथ कॉ,न्डो-मलेस से-क्स करते हैं उन्हें सामान्य लोगों की तुलना में बीमारी होने की संभावनाएं अधिक होती है। ऐसे में कॉ,न्डो-मलेस से-क्स को छोड़ संभोग के दौरान कॉन्डोम का इस्तेमाल कर ऐसे रिस्क को कम किया जा सकता है। वहीं नए पार्टनर के साथ से.,क्स करने के पहले एसटीआई की जांच करवाकर खतरों को कम किया जा सकता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ बीमारी है जिसका सामान्य जांच में भी उसके बारे में पता नहीं चलता है, जैसे एचपीवी  यह एसटीआई टेस्ट में पता नहीं चलता है। ऐसे में एक्सपर्ट यही सुझाव देते हैं कि आप किसी नए पार्टनर के साथ शारिरिक संबंध बनाने जा रहे हैं तो जरूरी है कि एसटीआई की नियमित.

एसटीआई होने पर क्या एचआईवी की संभावना बढ़ जाती है? – कॉ,न्डो-मलेस से-क्स का एक दुष्प्रभाव यह भी है कि वैसे लोग जिन्हें से,क्शु.अल ट्रांसमिटेड डिजीज है वैसे व्यक्तियों को सामान्य की तुलना में एचआईवी होने की संभावना अधिक रहती है। खासतौर पर सिफलिस, हर्पिस और गोनोरिया से ग्रसित लोगों को एचआईवी की संभावना सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहती है।

झारखंड की यूनिवर्सल संस्था के मिलकर एचआईवी मरीजों के लिए काम कर रहे जमशेदपुर के होमियोपैथिक डाक्टर नागेन्द्र शर्मा बताते हैं कि एसटीडी के अंदर आने वाली सामान्य बीमारियों में सिफलिस, गोनोरिया, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस एचपीवी एचआईवी, हेपेटाइटिस ए, जेनाइटिस हर्पिस, फंगल इंफेक्शन सहित अन्य बीमारियां सामान्य हैं। जरूरी है कि एसटीडी से बचाव किया जाए। सुरक्षित यौन संबंध कायम कर इससे बचाव किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि सिर्फ एक ही पार्टनर के साथ शारिरिक संबंध बनाए, वहीं बीमारियों से बचाव के लिए कॉन्डोम का इस्तेमाल कर संभोग करना चाहिए।

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स में एचआईवी ट्रांसमिशन की भी अधिक संभावना एचआईवी पेनिस के म्यूकस मेंम्ब्रेन, वजाइना और एनस से एक से दूसरे में आसानी से फैल सकती है। संभावना है कि यह बीमारी मुंह सहित शरीर के अन्य हिस्सों में कट, घाव सहित अन्य कारणों से एक से दूसरे में फैल सकती है। कॉन्डोम और डेंटल डैम संभोग के दौरान अवरोधक का काम करते हैं, जिससे एचआईवी ट्रांसमिशन की संभावना कम होती है। वहीं यदि कोई बिना कॉन्डोम के से.,क्स करता है तो प्रोटेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती है ऐसे में उन्हें बीमारी होने की संभावना भी अधिक रहती है।

द सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार वैसे लोग जो से.,क्स के दौरान कॉन्डोम का इस्तेमाल करते हैं वो एचआईवी जैसी बीमारी से ज्यादा सेफ रह पाते हैं। अन्य कॉन्डोम की तुलना में लेटेक्स कॉन्डोम एचआईवी की बीमारी से बचाव के लिए ज्यादा सुरक्षित होते हैं। यदि आपको लेटेक्स से एलर्जी है तो ऐसे में आप पॉलीयूरेथेन और पॉलीसोप्रीन कॉन्डोम का इस्तेमाल कर एचआईवी ट्रांसमिशन की संभावनाओं को कम कर सकते हैं। लेकिन यह कॉन्डोम लेटेक्स कंडोम की तुलना में ज्यादा जल्दी फट जाते हैं।

एचआईवी टेस्टिंग है काफी जरूरी – जब कोई व्यक्ति एचआईवी से ग्रसित होता है तो एक निश्तित समय तक परिक्षण के बावजूद उसमें एचआईवी नहीं दिखता है। इस समय काल के बीच में जो एचआईवी की जांच करता है उसकी रिपोर्ट एचआईवी निगेटिव आती है। जबकि यह व्यक्ति संक्रमित हो चुका होता है। इस समय को विंडो पीरियड कहा जाता है।

यह विंडो पीरियड बायोलॉजिकल फैक्टर पर निर्भर करता है वहीं किस प्रकार का टेस्ट किया जा रहा है उसपर भी निर्भर करता है। सामान्य तौर पर एक से तीन महीनों के बाद टेस्ट में एचआईवी का पता चल जाता है। विंडो पीरियड के दौरान यदि संक्रमित व्यक्ति किसी अन्य के साथ संभोग करता है तो उसे भी संक्रमित कर सकता है। जबकि एचआईवी टेस्ट में वो संक्रमित नहीं पाया गया था।

कुछ से.,क्स के प्रकार में रहती है बीमारी के फैलने की ज्यादा संभावनाएं से.,क्स के दौरान एचआईवी संक्रमित होने की संभावना से.,क्स के प्रकार के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर ओरल से.,क्स की तुलना में एनल से.,क्स करने वालों को बीमारी की संभावनाएं कहीं ज्यादा रहती है।

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स करने वालों के साथ यदि वो एनल से.,क्स करें तो उन्हें एचआईवी होने की संभावनाएं अधिक रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एनस में घाव होने की संभावना अधिक रहती है, जिसके कारण रक्तकोशिकाओं तक में वायरस चला जाता है। वहीं जो एनल से.,क्स करते हैं उन्हें यह बीमारी होने की अधिक संभावना रहती है, इसे बॉटोमिंग भी कहा जाता है।

वजाइना से.,क्स के दौरान भी एचआईवी एक से दूसरे में आसानी से जा सकता है। बता दें कि एनस की लाइनिंग वाल की तुलना में वजाइना की लाइनिंग वाल ज्यादा मजबूत होती है। इस वजह से एचआईवी संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है। ओरल से.,क्स की बात करें तो कॉ,न्डो-मलेस से-क्स या बिना डेंटल डैम के से.,क्स किया जाए तो इसमें एचआईवी ट्रांसमिशन की संभावना काफी कम रहती है। यदि ओरल से.,क्स करने के दौरान आपके पार्टनर को मुंह में घाव है, ब्लीडिंग गम सहित अन्य समस्या है तो संभावनाएं अधिक है कि आपको भी एचआईवी की बीमारी हो सकती है।

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स से गर्भवती होने की है संभावना – वैसे कपल्स जो संभोग करने के दौरान किसी प्रकार के प्रोटेक्शन का इस्तेमाल नहीं करते हैं वैसे लोगों में देखा गया है कि गर्भवती होने की संभावना अधिक रहती है। प्लांड प्रेग्नेंसी के अनुसार सामान्य की तुलना में प्रेग्नेंसी को टालने के लिए कॉन्डोम का इस्तेमाल 98 फीसदी कारगर होता है। कॉ,न्डो-मलेस से-क्स करने वाले लोगों को प्रेग्नेंसी टालने के लिए गर्भनिरोधक दवा का सेवन करना पड़ सकता है।

कॉन्डोम तभी काम करेगा जब उसका सही तरीके से होगा इस्तेमाल – एचआईवी और अन्य से,क्शु.अल ट्रांसमिटेड डिजीज से बचाव के लिए कॉन्डोम काफी इफेक्टिव होता है। लेकिन यह तभी संभव है जब इसका सही से इस्तेमाल किया जाए। एक कॉन्डोम को प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए  इसे हमेशा यौन संपर्क में आने से पहले लगाए, क्योंकि बैक्टीरिया और वायरस योनि द्रव के माध्यम से आपके शरीर में टच हो सकता है कुछ मामलों में शरीर के अंदर जाने से बीमारी हो सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कॉन्डोम के साथ हमेशा वाटर बेस्ड लूब्रिकेंट का ही इस्तेमाल करें, संभावना रहती है कि यदि कोई ऑयल बेस्ड लूब्रिकेंट का इस्तेमाल करता है तो कॉन्डोम के फटने की संभावना अधिक रहती है।

कॉ,न्डो-मलेस से-क्स को लेकर ध्यान देने योग्य बातें – इस लेख से हमें यही पता चला कि कॉ,न्डो-मलेस से-क्स से एसटीआई सहित कई प्रकार की बीमारी आसानी से फैल सकती है यहां तक कि अनचाहा गर्भ भी ठहर सकता है। ऐसे में कॉ,न्डो-मलेस से-क्स को छोड़ हमेशा संभोग के दौरान कॉन्डोम का इस्तेमाल करनी चाहिए। इसलिए जरूरी है कि आप कॉन्डोम का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। वहीं यदि आप नए पार्टनर के साथ संभोग स्थापित कर रहे हैं तो जरूरी है कि एसटीआई की जांच करवा लें। अधिक जानकारी के लिए और कॉ,न्डो-मलेस से-क्स को लेकर आप चाहें तो डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं। वहीं उनके बताए दिशा निर्देशों को अपनाकर बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।

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