गर्भ में कैसे बनते है किन्नर, जानिये किन्नर पैदा होने के कारण..

दोस्तों इंसान की पहचान ही उसे जीने की वजह देती है,लेकिन अगर किसी इंसान की पहचान ही उसके लिए जीवन भर की सज़ा बन जाए, और ये समाज ही उसे स्वीकार न करे को कोई इंसान ऐसे में कैसे अपना जीवन जिए ! दरअसल हम बात कर रहे है किन्नर की ! किन्नर कौन होते है ये तो आप सभी जानते ही होंगे !किन्नरों को ट्रांसजेंडर भी कहा जाता है यानी किन्नर वो लोग होते है जिन्हें इस समाज में ना तो पुरुष माना जाता है और न ही महिला ! भले ही समाज इन्हें सम्मान नहीं देता, स्त्री, पुरुष की गिनती में नहीं मानता लेकिन फिर भी इन्हें जीना तो पड़ता ही है.

आपने अक्सर अपने आसपास, या कही किसी के घर किन्नरों को गाना गाते और डांस करते देखा होगा, माना जाता है कि किन्नर का कहा हुया कोई भी शब्द खाली नहीं जाता ! यदि कोई किन्नर किसी को दुआ दे तो इनकी दुआ जरुर लगती है !लेकिन यदि किन्नर गुस्से में आकर किसी के लिए अपशब्द निकाल ले तो भी उनके शब्द कभी खाली नहीं जाते,वो सच हो जाती है ! इसलिए लोग हमेशा यही कोशिश करते है कि कोई किन्नर उनसे नाराज़ न हो औए उन्हें किन्नरों की दुआ मिले बददुआ नहीं.

इसी कारण लोग इनकी दुआ लेने के लिए इन्हें अपनी खुशियों में शामिल करते है और इन्हें इनका मनचाहा उपहार देते है ! लेकिन सवाल ये उठता है किजन्म देने वाली तो कोई पूर्ण स्त्री होती है तो आखिर किन्नर का जन्म कैसे होता है ! कुछ लोगो का मनाना है की पिछले जन्म में किये पापो को भोगने के लिए किन्नर का जन्म होता है तो कुछ कहते है कि जन्म के समय ग्रहों के कारण ऐसा होता है ! लेकिन कोई इस बात को नही जानता कि वास्तव में किन्नर का जन्म कैसे होता है.

दोस्तों हमारे समाज में किन्नरों को सम्मान की दृष्टि ने नहीं देखा जाता ! इनकी गिनती न तो पुरुषो में होती है और न ही महिलायों में,इसलिए इन्हें इस समाज की कई सुविधायों से भी बांछित रहना पड़ता है और पुरी ज़िन्दगी को परेशनियो और समाज की अपमान भरी निगाहों के साथ ही जीना पड़ता है ! भले ही हमारा समाज इन्हें वो सम्मान न दें लेकिन हम इस बात को झुठला नहीं सकते कि किन्नर हमारे समाज का ही एक हिस्सा है ! चलिए जानते है कि किस वजह से गर्भ में पल रहा बच्चा कैसे बन जाता है किन्नर ! जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके पहले 3 महीने में बच्चे के जेंडर का पता चल जाता है कि वो लड़का होगा या लड़की.

लेकिन इस दौरान अगर कोई महिला अपने खान पान गड़बड़ कर देती है, उस महिला की कोई हारमोंस प्रॉब्लम होती है या महिला के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे के ऊपर पड़  जाता है जिसके कारण उस बच्चे में लड़का और लड़की दोने के गुण आ जाते है यही कारण है की प्रेगनेंसी की शुरुआत के 3 महीने में ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ! 3 महीने के बाद बच्चे का विकास होना शुरू हो जाता है ! अब बताते है कि गर्भ में पल बच्चे का लिंग कैसे निर्धारण किया जाता है ! हमारी बॉडी में 46 क्रोमोजोंम होते  है जिनमे 40 औटोसोम होते है और 2 सेक्स क्रोमोजोम होते है.

इन्ही दोनों क्रोमोजोम से शिशु का जेंडर पता चलता है ! पुरुषो के अंदर XY क्रोमोजोम होते है और महिलायों में XX ! इन दोनों के मिलने से ही गर्भ धारण होता है ! अगर XY होता है तो लड़का और अगर XX होता हो तो लड़की होती है ! लेकिन अगर इन दोनों की बजाय कोई तीसरा पेयर ही बन जाता है जैसे XXX, YY या OX, तो गर्भ में पलने वाला बच्चा किन्नर पैदा होता है ! साइंस की भाषा में इसे कोमोजोम डिस आर्डर कहते है ! जिसके कारण बच्चे में लड़का और लड़की दोनों के गुण  आ जाते है.

अब जानते है कि ये तीसरा पेयर बनता कैसे है यानी क्रोमोजोम डिस आर्डर होता कैसे है ! दोस्तों गर्भवती महिला जिस प्रकार रहती है, जिस प्रकार अपनी देखभाल करती है, जो कुछ भी खाती- पीती है, अपने आप को जिस भी माहौल में रखती है, खुश रहती है या दुःखी रहती है इन सभी बातो का असर सीधा गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है.

यहाँ तक कि यदि महिला को किसी भी तरह की कोई बीमारी होती है तो भी उसका असर उसके शिशु पर पड़ता है ! क्युकी बीमारी में यदि वो महिला दवाई की हेवी डोज़ ले ले, या कोई  गलत दवा खा लें तो इसके कारण भी बच्चा किन्नर पैदा हो सकता है ! या फिर खराब खाने पिने से भी इस तरह के चांस बढ़ जाते है, या फिर महिला के साथ कोई दुर्घटना हो जाए तो भी गर्भ में तीसरा पेयर बनने के चांस होते है यही कारण है कि महिला.

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